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सिर्फ मैं

ज़पिघले नीलम सा बहता हुआ यह समां,
नीली नीली सी खामोशियाँ,
न कहीं है ज़मीन,
न कहीं आसमां,
सरसराती हुयी टहनियां, पत्तियां,
कह रही हैं की बस एक तुम हो यहाँ,
सिर्फ मैं हूँ मेरी सांसें हैं और मेरी धडकनें,
ऐसी गहराइयाँ,
ऐसी तनहाइयाँ,
और मैं, सिर्फ मैं,
अपने होने पे मुझको यकीन आ गया|

~जावेद अख़्तर

 

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